Shades of Spiritual Tourism! ख्‍वाजा के दरबार में हाजिरी

अजमेर तक का रास्‍ता नापना कभी भी मुश्किल नहीं लगता। अलबत्‍ता, उस शहर की गलियों को छोड़कर लौटते हुए मन ने हमेशा कहा है कि फिर बुलाना, जल्‍दी बुलाना। इंसानी फितरत है दुआ करना, वो पूरी कितनी होती है, किसकी होती है, पता नहीं . . . लेकिन फिर भी आदतन हम दुआ करते हैं।…