My annual pilgrimage to #Jaipur for #ZeeJLF

 जयपुर लिट फैस्ट के बहाने आवारगी जयपुर कभी सिर्फ सैलानियों और खरीदारों की मंजिल था, आज आखर का मेला भी इसकी पहचान देश-दुनिया तक पहुंचा रहा है। जब गुलाबी नगरी में हर्फों और लफ्ज़ों के शामियाने तन जाते हैं तो इसकी हर सड़क सिर्फ डिग्गी पैलेस तक पहुंचती है।  साहित्य की इसी रासलीला में गोते लगाकर…

Go wild, explore wildlife!

सर्दियों की आहट है जंगलों के बंद कपाट खुलने की चाभी! मानसून सिमटने के बाद अक्टूबर-नवंबर तक आते-आते जंगलों में बहार देखने लायक होती है। हरियाली अपने शबाब पर होती है, पेड़ों की शाखें बारिश से धुलने के बाद इतराने लगती हैं और पूरे जंगल में जिंदगी एक बार फिर नए सिरे से करवट लेती दिखती…

Winter Destination – snow or desert? What is your plan?

अगर आप अभी तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि सर्दियों में कहां सैर-सपाटा किया जाए तो यकीन मानिए इस दुविधा से जूझने वाले आप अकेले नहीं हैं। लेकिन आपका सवाल हो सकता है कि सर्दियां ही क्यों ? वो इसलिए कि भारत जैसे गर्म देश में सर्दियां ही सैर-सपाटे के लिहाज से आदर्श…

a day’s trip to potter’s village .. where dreams are made of clay!

इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल ………… वो करीब साढ़े तीन दशक पहले सूखे और गरीबी से आजिज़ आकर अलवर (राजस्‍थान) में अपने घरों को छोड़कर अनजान मंजिल की तरफ बढ़ चले थे। उनके काफिलों में उनकी औरतों, बच्‍चों, कुछ बर्तन-भांडों, कपड़ों-लत्‍तों के सिवाय जो एक बड़ी चीज़ शामिल थी वो था उनका हुनर।…

Shades of Spiritual Tourism! ख्‍वाजा के दरबार में हाजिरी

अजमेर तक का रास्‍ता नापना कभी भी मुश्किल नहीं लगता। अलबत्‍ता, उस शहर की गलियों को छोड़कर लौटते हुए मन ने हमेशा कहा है कि फिर बुलाना, जल्‍दी बुलाना। इंसानी फितरत है दुआ करना, वो पूरी कितनी होती है, किसकी होती है, पता नहीं . . . लेकिन फिर भी आदतन हम दुआ करते हैं।…