An encounter with Zoroastrianism, my journey in Parsi-land

रीतियों—रिवायतों के गलियारों में सफर  मई की उस दोपहर जनपथ पर लगी प्रदर्शनी के एक-एक सैक्शन, फ्रेम दर फ्रेम, प्रतिकृतियों (replicas) के सामने से गुजरते हुए मैं उस धर्म और उसकी स्थापनाओं से पहली बार रूबरू हो रही थी जो ईसाईयत से करीब डेढ़ हजार साल पहले और इस्लाम की जड़ों के फूटने से लगभग…

the homecoming!

 मैं बहुत दिनों बाद इतरायी थी उस रोज़ .. क्या आपको घर के सपने आते हैं? मुझे अक्सर आते हैं, पुराने—पुराने घरों के, बहुत पुराने, नामालूम वो कबकी यादें होती हैं जो सपनों में घुसपैठ कर जाती हैं और फिर मुझे उन घरों में ले जाती हैं जिन्हें चेतन कभी का भुला चुका होता है।…