Rann Utsav – an evening in Kachchh

कच्छ की रूह से रूबरू होने की उम्मीद शाम-ए-सरहद बीतने को थी। रन पर बिखरी झिलमिलाती सफेदी अब धीरे-धीरे और भी चटख होने लगी थी। सूरज का वो विशालकाय गोला पानी में छपाक से गिरा और डूबता रहा, देर तलक … दूर क्षितिज उसे अपनी गोद में समोता रहा था। हिंदुस्तान के धुर पश्चिम में…

Go wild, explore wildlife!

सर्दियों की आहट है जंगलों के बंद कपाट खुलने की चाभी! मानसून सिमटने के बाद अक्टूबर-नवंबर तक आते-आते जंगलों में बहार देखने लायक होती है। हरियाली अपने शबाब पर होती है, पेड़ों की शाखें बारिश से धुलने के बाद इतराने लगती हैं और पूरे जंगल में जिंदगी एक बार फिर नए सिरे से करवट लेती दिखती…

Kutch – a Surreal world!

कच्छ के आकाश में तनी होती है चांद सितारों की चादर और नीचे सफेद नमकीन रेगिस्तानी पटल पर उभरता है झिलमिल नगरी का अक्स। अदभुत! अकल्पनीय!! भारत के जिस छोर पर जाकर सूरज दिनभर की थकान के बाद अपने बिस्तर पर लेटने की तैयारी करता है, वहां दूर-दूर तक नमक का रेगिस्तान पसरा है और…

Rann Utsav – a Picture Essay!

गुजरात के सफर में बिग बी आपके साथ होते हैं, वर्चुअली ! रन उत्सव के लिए सजी-धजी खड़ी धोरडो टैंट सिटी की ओर बढ़ते हुए यह अहसास लगातार साथ बना रहता है। कभी ड्राइवर रावजीभाय के मुंह से तो कभी राह चलते राहगीर से रास्ता पूछने के लिए रुकने-रुकाने के क्रम में ’बच्चन साहब का…