Rann Utsav – an evening in Kachchh

कच्छ की रूह से रूबरू होने की उम्मीद शाम-ए-सरहद बीतने को थी। रन पर बिखरी झिलमिलाती सफेदी अब धीरे-धीरे और भी चटख होने लगी थी। सूरज का वो विशालकाय गोला पानी में छपाक से गिरा और डूबता रहा, देर तलक … दूर क्षितिज उसे अपनी गोद में समोता रहा था। हिंदुस्तान के धुर पश्चिम में…