Chasing architectural marvels of Chandelas in Bundekhand

कलिंजर के कालजयी किले में हम सुबह-शाम खजुराहो मंदिरों के मंडपों-महामंडपों को जाने कितनी बार लांघ चुके थे। हर बार पिछली दफा देखा मंदिर फिर-फिर नया लगने लगता था। चौंसठयोगिनी में सवेरे की हल्की धूप के उस पार से झांकता कंदारिया महादेव का मंदिर फिर ललचा रहा था तो दिन ढले सूरज की आखिरी किरणों…

Khajuraho – Beyond Erotic

खजुराहो – भारतीय सभ्यता का प्रेम गान खजुराहो में अब वक्त सरकता नहीं है, लगता है जैसे चंदेल राजाओं के जमाने से ही दिन और रात यहां बस यूं ही टिके हैं, वहीं रुके हैं जहां पत्थरों पर छैनी की अंतिम चोट पड़ी थी। इन पत्थरों में शिल्प की बुलंदियां दिखायी देती हैं और साथ…