The mystery behind Rohtang, the corpse strewn pass in the Himalayas

संसार के उस पार का संसार  कुल्लू कभी ‘कुलूत’ था यानी सभ्यता का अंतिम पड़ाव और मान लिया गया था कि उसके आगे संसार खत्म हुआ जाता है। और वो जो बर्फ की खोह में बसता था लाहुल—स्पीति का संसार, अलंघ्य और अविजित रोहतांग दर्रे के उस पार उसका क्या? वो हमारे—आपके साधारण संसार से…

Why Spitian village Langza at more than 4400m is a part of my permanent memory

काज़ा (https://en.wikipedia.org/wiki/Kaza,_Himachal_Pradesh) से 14 किलोमीटर दूर लांग्ज़ा गांव की ढलानों पर छोटे बच्चों ने मुझे घेर लिया था। उन नन्हें हाथों में शालिग्राम ठुंसे थे जिन्हें वो औने-पौने दाम में पर्यटकों को बेचते रहते हैं। भूविज्ञान (Geology) में ये जीवाश्म (Fossils) हैं और आस्था ने उन्हें विष्णु के प्रतीक बना दिया है। खरीदूं या न…