How to spend next two weeks in the capital #Delhi

चलो मिल आएं अपनों से, अपने ही शहर में दूर-दराज के आसमान टटोलने वाले हम सफरबाज़ों को कभी-कभी खुद अपने पंख कतर लेने चाहिए, और निकल पड़ना चाहिए अपने ही आंगन में यहां-वहां जमा अफसानों को टटोलने, नज़ारों को देखने और इसी बहाने अपने आप से मिलने। कितना अलग अहसास होता है न वो जब…