Hobnobbing with the tribals of Bastar*

जगदलपुर में लोहांडीगुड़ा के इस हाट बाज़ार में ख्वाहिशों के कैसे-कैसे रंग देखे। हाट बाज़ार में अपने खेतों की उपज बेचने 50- 60 किलोमीटर दूर-दूर के देहातों से चले आते हैं ये आदिवासी। और बदले में गुड़, साबुन, तेल, गहने की खरीदारी में पूरी कमाई उड़ाकर लौट जाते हैं। सादगी की बानगी तो देखिए, मेरे…

Bastar – potpourri of tribal heritage बस्तर के बियाबानों में

बस्तर में उस गहराती शाम के सन्नाटे का रोमांच आज भी ताज़ादम है। कांगेर वैली नेशनल पार्क में तीरथगढ़ जलप्रपात को देखकर अकेली लौट रही थी। सर्पीले मोड़ काटती सड़क पर भूले भटके एक वनवासी धनुष-बाण लिए जाता दिखा, उससे आंखे चार हुई, मुस्कुराहटों का आदान-प्रदान हुआ और मैं अपनी राह, वो अपनी … जुबानें…

Chhattisgarh – celebration of art and Culture छत्तीसगढ़ – लीक से हटकर पर्यटन

बर्तोलिन ने एक दफा कहा था, जो सहज उपलब्ध है, वही बिकता है। शायद यही वजह रही होगी कि गोवा, मुंबई, राजस्थान जैसे ठौर—ठिकाने ट्रैवल जगत का हिस्सा कभी का बन चुके हैं जबकि सुदूर में सजी पूर्वोत्तर राज्यों की मणियां हों या लद्दाख का दुर्गम इलाका अथवा छत्तीसगढ़ जैसा ट्राइबल आबादी की पारंपरिक सुगंध…