An encounter with Zoroastrianism, my journey in Parsi-land

रीतियों—रिवायतों के गलियारों में सफर  मई की उस दोपहर जनपथ पर लगी प्रदर्शनी के एक-एक सैक्शन, फ्रेम दर फ्रेम, प्रतिकृतियों (replicas) के सामने से गुजरते हुए मैं उस धर्म और उसकी स्थापनाओं से पहली बार रूबरू हो रही थी जो ईसाईयत से करीब डेढ़ हजार साल पहले और इस्लाम की जड़ों के फूटने से लगभग…

The White Rann and my nomadic quest

Come closer to your past  ‘’Are you a history buff? Or a researcher? Or a history teacher?’’ ‘’None.’’ My reply to the Gujarat Tourism manager handling bookings for one of the remotest resorts in the country was simple but expressions on his face suggested he was not convinced. Then why are you going to that…

Rann Utsav – an evening in Kachchh

कच्छ की रूह से रूबरू होने की उम्मीद शाम-ए-सरहद बीतने को थी। रन पर बिखरी झिलमिलाती सफेदी अब धीरे-धीरे और भी चटख होने लगी थी। सूरज का वो विशालकाय गोला पानी में छपाक से गिरा और डूबता रहा, देर तलक … दूर क्षितिज उसे अपनी गोद में समोता रहा था। हिंदुस्तान के धुर पश्चिम में…

Dholavira – Harappan heritage in Gujarat धौलावीरा में सुनें बीते युग की आहट

समंदर का कलरव और रेगिस्तान का मौन हमें अपने आपसे मिलवाता है और इसी अहसास को साक्षात् अनुभव करने के लिए गुजरात के रन में चले आइये। कच्छ के रन में सुदूर क्षितिज तक फैली नमकीन सफेदी के बीच उग आए बेट (रेतीली जमीन पर टीलेनुमा ऊंचे इलाके) अतीत में अगर सभ्यता के पालने रहे…