An encounter with Zoroastrianism, my journey in Parsi-land

रीतियों—रिवायतों के गलियारों में सफर  मई की उस दोपहर जनपथ पर लगी प्रदर्शनी के एक-एक सैक्शन, फ्रेम दर फ्रेम, प्रतिकृतियों (replicas) के सामने से गुजरते हुए मैं उस धर्म और उसकी स्थापनाओं से पहली बार रूबरू हो रही थी जो ईसाईयत से करीब डेढ़ हजार साल पहले और इस्लाम की जड़ों के फूटने से लगभग…

Knowing a place by its smell, fragrance, feel and sound

  लैंसडाउन में वो नवंबर की महक आज भी याद है। वाकया पूरे 25 बरस पुराना है। यों ही, हां, बस यों ही लैंसडाउन की सड़क पर बढ़ चले थे हम। रोडवेज़ की खटारा बस की उस अदद सवारी को भी भूली नहीं हूं। पूरे दो घंटे का वो सफर, पहाड़ों पर गोल—गोल घूमते हुए,…