It’s pouring travel in monsoon

सावन की अलबेली गलियां जेठ का महीना लगते ही हमने उस साल अरब सागर से उठती मानसूनी भाप को मुट्ठियों में जमा करने का इंतज़ाम कर लिया था। अल्टीन्हो का सरकारी गैस्ट हाउस एक हफ्ते के लिए हमारा था। मडगांव से पंजिम तक के सफर की वो रात कोई साधारण रात नहीं थी। बादल जैसे…

Slow and Solo in Bastar*!

बस्तर* के बियाबानों में बस्तर में उस गहराती शाम के सन्नाटे का रोमांच आज भी ताज़ादम है। कांगेर वैली नेशनल पार्क में तीरथगढ़ जलप्रपात को देखकर अकेली लौट रही थी। सर्पीले मोड़ काटती सड़क पर भूले भटके एक वनवासी धनुष-बाण लिए जाता दिखा, उससे आंखे चार हुई, मुस्कुराहटों का आदान-प्रदान हुआ और मैं अपनी राह,…

Hobnobbing with the tribals of Bastar*

जगदलपुर में लोहांडीगुड़ा के इस हाट बाज़ार में ख्वाहिशों के कैसे-कैसे रंग देखे। हाट बाज़ार में अपने खेतों की उपज बेचने 50- 60 किलोमीटर दूर-दूर के देहातों से चले आते हैं ये आदिवासी। और बदले में गुड़, साबुन, तेल, गहने की खरीदारी में पूरी कमाई उड़ाकर लौट जाते हैं। सादगी की बानगी तो देखिए, मेरे…