Discovering the other side of ‘Bombay’

बेचैन शहर के सीने में सुकून की लकीरों को पकड़ना फोर्ट से बांद्रा के होली फैमिली अस्पताल तक काली-पीली टैक्सी की सवारी तय की। बारिश से नहायी, भीगती-भागती सड़कों पर टैक्सी दौड़ रही थी, मैंने आजू-बाजू की खिड़कियां खोल रखी थीं .. ताकि फोर्ट की गोदी में भरे पानी की भाप ने जिन बूंदों का…

Pursuing monsoon, chai and happiness in Darjeeling

दार्जिलिंग — चाय और विरासत के नाम एक सफर लेबॉन्ग घाटी में उतरते हुए उस दिन का ढलता सूरज साथ था। घाटी के उस पार की पहाड़ियों के कंधों पर बादल टंग चुके थे और सूरज किसी तरह अपनी हस्ती को संभाले था। एक फीकी-सी केसरिया लपट से आसमान को रंगने की फिज़ूल कोशिश में…

India’s rich biodiversity hotspots are inviting, where are you?

भारत के नेशनल पार्क  आज मैं आपको ले चलती हूं कुछ प्रमुख नेशनल पार्कों की तरफ जहां वाइल्डलाइफ प्रेमी होने के नाते जाने का बहाना जरूर निकालना चाहिए: 1. जिम काॅर्बेट नेशनल पार्क – यह प्रोजेक्ट टाइगर रिज़र्व तथा भारत का पहला नेशनल पार्क है। 1936 में हेली नेशनल पार्क के तौर पर स्थापित  कॉर्बेट…

Love slow travel, plan a journey aboard Darjeeling Himalayan Railway

Experience the the grandeur of heritage railway यात्राएं आधुनिक जीवन में जरूरी-सी बनती जा रही हैं। बिज़नेस ट्रिप हो या सैर-सपाटे के नाम पर अक्सर हड़बड़ी वाला सफर आपको सस्ती एयरलाइंस की तरफ मोड़ देता है। घंटे-दो घंटे में अपने शहर से दूर, किसी दूसरी ही फिज़ा में पहुंचना तत्काल सुकून बेशक देता है लेकिन तुरत-फुरत…

Ramoji film city – the land of million dreams

दक्कन में 48 घंटे कुल जमा 48 घंटों की मोहलत अगर किसी शहर को खंगालने की मिली हो तो भी आप क्या कुछ नहीं कर सकते, इसी चुनौती को बीते महीने स्वीकारा था। हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से काउंटडाउन शुरू हो चुका था। मगर हवाईअड्डे की दीवारों ने जैसे साजिशें शुरू कर दी…

In the times of Rowling’s Harry Potter let’s take a turn to Khurja’s Potters

चिमनियों के शहर में खुर्जा से दोबारा वास्ता बना था करीब डेढ़ दशक बाद। पहली बार जब देखा तो सिर्फ शॉपिंग के अड्डे के तौर पर, जहां से सस्ते में ढेरों सामान खरीद लायी थी – सेरेमिक पॉट्स से लेकर सूप बोल्स, प्लेटें, कॉफी मग, कप, टी-पॉट और भी जाने क्या-क्या। फिर वक़्त की बेरहमी…

How travelling with mom taught me the secrets of slow travel

सीनियर सिटीज़न पेरेंट्स के संग सफर वाकई है आसान  मैं भूल जाती हूं अपने एजेंडा, अपनी दौड़-भाग वाला पर्यटन, अपनी रफ्तार, अपनी हजारों ख्वाहिशें … मां के साथ सफर का मतलब है, मां, उनकी मंज़िल और मर्जी भी उनकी। बारिश मेरे लिए रोमांस है और उनके लिए कीचड़! पूरे एक सौ अस्सी डिग्री का फर्क…