Discovering the other side of ‘Bombay’

बेचैन शहर के सीने में सुकून की लकीरों को पकड़ना फोर्ट से बांद्रा के होली फैमिली अस्पताल तक काली-पीली टैक्सी की सवारी तय की। बारिश से नहायी, भीगती-भागती सड़कों पर टैक्सी दौड़ रही थी, मैंने आजू-बाजू की खिड़कियां खोल रखी थीं .. ताकि फोर्ट की गोदी में भरे पानी की भाप ने जिन बूंदों का…

An encounter with Zoroastrianism, my journey in Parsi-land

रीतियों—रिवायतों के गलियारों में सफर  मई की उस दोपहर जनपथ पर लगी प्रदर्शनी के एक-एक सैक्शन, फ्रेम दर फ्रेम, प्रतिकृतियों (replicas) के सामने से गुजरते हुए मैं उस धर्म और उसकी स्थापनाओं से पहली बार रूबरू हो रही थी जो ईसाईयत से करीब डेढ़ हजार साल पहले और इस्लाम की जड़ों के फूटने से लगभग…

The White Rann and my nomadic quest

Come closer to your past  ‘’Are you a history buff? Or a researcher? Or a history teacher?’’ ‘’None.’’ My reply to the Gujarat Tourism manager handling bookings for one of the remotest resorts in the country was simple but expressions on his face suggested he was not convinced. Then why are you going to that…

Peeling back the layers of a city’s past #Delhi6

मुज़फ्फर जंग के बहाने विरासत से रूबरू होने की दास्तान  “Any society ignorant of its past is in danger of misunderstanding the present” – Daniel Snowman इतिहास के झरोखों से झांकते हुए, ढहती दीवारों, चटकती मीनारों या रेत होते खंडहरों को टांपते हुए मुझे हमेशा महसूस हुआ है कि मैं यहीं की हूं। स्कूल में…

where stones are waiting to stun you #Bhojpur #Shiva Temple

एक अधूरे मंदिर की दास्तान दोपहर बाद भोपाल के बड़ा तालाब की हदों को पीछे छोड़कर हमारी कार रायसेन जिले की गोहरगंज तहसील में दाखिल हो चुकी थी। होशंगाबाद रोड पर भोपाल से यही कोई 30-32 किलोमीटर की दूरी पर था यह भोजेश्वर मंदिर यानी वास्तुशिल्प का वो अद्भुत नमूना जो अपने अधूरेपन की वजह से…