भूटाननामा

सफरनामा  कल राजधानी थिंपू को अलविदा कहा और एक के बाद एक वादियों को टापते-लांघते, पहाड़ों के घुमावदार रास्तों पर बार-बार चढ़ते-उतरते हुए करीब 5 घंटे का सफर पूरा कर शाम  6 बजे फ्युंशलिंग लगे। पहाड़ी रास्तों पर कोस्टर बस में सफर का यह पहला अनुभव था, जो सहज और सुखद बीता। हिंदुस्तानी आदतों के…

भूटान : प्रार्थना ध्वज से स्वर्ग की राह

दुनिया में ऐसे देश बेशक हो सकते हैं जहां रेलगाड़ियां नहीं दौड़ती मगर ऐसा कोई देश शायद ही होगा जिसकी सड़कों पर एक से बढ़कर एक लग्ज़री कारें तो दौड़ती हैं मगर ट्रैफिक सिग्नल की जरूरत जहां 21वीं सदी में भी महसूस नहीं होती। भारत के पूर्वोत्तर में बसे, नन्हे हिमालयी देश भूटान में ऐसे…