Peeling back the layers of a city’s past #Delhi6

मुज़फ्फर जंग के बहाने विरासत से रूबरू होने की दास्तान 

“Any society ignorant of its past is in danger of misunderstanding the present” – Daniel Snowman

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इतिहास के झरोखों से झांकते हुए, ढहती दीवारों, चटकती मीनारों या रेत होते खंडहरों को टांपते हुए मुझे हमेशा महसूस हुआ है कि मैं यहीं की हूं। स्कूल में विज्ञान और फिर पेशेवर जिंदगी की राह पर बढ़ने से पहले जर्नलिज़्म की क्लासों में भी इतना आनंद नहीं आया करता था जितना अब आसमान के नीचे खुलते इतिहास के पन्नों में आता है। वैसे कह नहीं सकती कि हिस्ट्री स्टूडेंट होती तब भी क्या बीते युगों की परतों को पलटते हुए इतना ही मज़ा आया करता या नहीं।

लेकिन अब मैं इतिहास के दरवाज़ों को अकेले नहीं खोलती। कोशिश रहती है किसी ऐतिहासिक चश्मे से, किसी इतिहासकार की निगाह से, किसी पुरातत्व विज्ञानी का हाथ पकड़कर पुराने, गुज़र चुके वक़्त में उतरने की। और जब भी ऐसा करने का मौका मिलता है तो महसूस करती हूं कि वही पत्थर जिसके करीब से यों ही गुज़र गया होता है वक़्त, हमारे ज़रा ठहरने पर हमसे बोलने को उतना ही बेताब होता है जितना हम उसकी कहानी सुनने को होते हैं।

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उस रोज़ ऐसा ही हुआ था जब हमने #LiddleSisters – इतिहासकार स्वप्ना लिड्डल और 17वीं सदी के मुगलई दौर के जासूसी किरदार मुज़फ्फर जंग की लेखक मधुलिका लिड्डल के साथ दिल्ली 6 में जनवरी की एक सर्द सुबह बितायी थी।

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Liddle Sisters at Naughara, Kinari Bazaar, Delhi 6

17 जनवरी 2016 की उसी सुबह उस मुगालते से मुक्त हुई थी मैं जिसे बचपन से पालती आ रही थी। वो यह कि लालकिले के ठीक सामने, लाल जैन मंदिर के उस पार का जो इलाका है वो चांदनी चौक है। मुझे मालूम है कि आप में से और भी कई होंगे जो आज से पहले तक ऐसा ही सोचते-मानते होंगे। और इसकी वजह है। दरअसल, इतिहासकार की उंगली पकड़कर जब अपने ही शहर को देखते हैं उसकी शक्लो-सूरत बदल जाती है, जिन पत्थरों, दीवारों को देखे बगैर गुज़र आते हैं उन पर चस्पां इबारत साफ-साफ दिखायी देने लगती है। Delhi : 14 Historic Walks  (Click here to buy) की लेखक स्वप्ना बता रही थीं कि टाउन हॉल के ठीक सामने का चौराहा ही दरअसल, चांदनी चौक है। क्योंकि किसी ज़माने में यहां एक जलाशय (water body) हुआ करता था जिसमें चांद की परछायीं गिरने से पूरा चौराहा रोशन हो जाया करता था। और बस उसका नाम चांदनी बिखेरने वाला चौका यानी चांदनी चौक पड़ गया। यह शाहजहानी दौर था। और जिस टाउन हॉल की ऐतिहासिक इमारत को हम देख रहे थे उसकी जगह कभी शाहजहां की बेटी जहांआरा की बनवायी शानदार सराय भी हुआ करती थी।

जनवरी की उस सर्द सुबह सराय का बस जिक्र बचा था!

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at the historic Chandni Chowk

कटड़ा नील की गलियों से होते हुए वो अनदेखा संसार दिखा था मुझे जिसकी कल्पना भी मैंने नहीं की थी। इसकी गलियों में कदम-कदम पर शिवालय थे, पुरानी हवेलियों में बने हुए, आज भी आबाद, दूध-पानी से नहाए शिवलिंग, बेलपत्र और फूलों, चंदन से ढके शिवलिंग।

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Swapna explaining a point in front of one of the many Shivalayas of Katra Neel

कटड़ों-कूचों की कहानियों में खोए हम सम्मोहित थे, के पीछे-पीछे ठीक वैसे ही चले जा रहे थे जैसे हैमलिन के पाइड पाइपर के पीछे कभी चले होंगे वो शहर भर के चूहे और फिर बच्चे …

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वैसे वो विरासत की सैर इस मायने में खास थी कि हम सिर्फ इतिहास से रूबरू नहीं हो रहे थे बल्कि उन जगहों पर जा रहे थे जहां Madhulika Liddle के क्राइम थ्रिलर Crimson City (Clich here to buy) के किरदार कभी रहे थे, गुजरे थे या इस नॉवेल में कोई वाकया वहां घटा था। कटड़ा नील से गुजरने की भी यही वजह थी। कभी किसी हवेली के सामने बने ओटला पर बैठते थे, गली में ठहरते थे, कहीं ठिठकते थे और मधुलिका Crimson City के अंश पढ़कर सुनाती थीं। #HeritageWalk और #BookReadingSession का गज़ब का मेल हो रहा था, और साक्षी बने हम Travel Correspondents/Bloggers Group (follow us #TCBG_trips) के travel Bloggers/writers/journalists जो #TCBG_trips और SALT * के बैनर तले इस विरासत की सैर पर आए थे।

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Crimson City, the fourth book in the Muzaffar Jang series

दिल्ली 6 की गलियों से गुजरना हो और जामा मस्जिद का दीदार न हो, ऐसा तो हो नहीं सकता। मधुलिका की Crimson City में क्राइम थ्रिलर का रोमांच जब अपने शबाब पर था तो सैटिंग जामा मस्जिद की वही सीढ़ियां बनी थीं जिन तक हम भी हेरिटेज वॉक के बहाने पहुंच चुके थे।

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One of the participants already lost in Crimson City! @Jama Masjid

इतिहास के झरोखों से झांकते हुए दिल्ली 6 में सर्द हवाओं और रोमांच की सिहरन महसूस की थी मैंने।

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And Madhulika gifted a copy of her latest thriller Crimson City to each one of us

* SALT
It is a Chandigarh-based non-profit started by a group of women interested in preservation and promotion of all manner of vulnerable heritage. Since its inception a few years ago it has organised children’s literature festivals, brought attention to little known music traditions, and promoted monumental heritage by writing and talking about it. Heritage walk on 17 Jan 2016 with walk leaders Swapna Liddle and Madhulika Liddle was conducted under the aegis of SALT as part of its commitment towards heritage appreciation.
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