Computerized draw of lots for selection of Yatris for the Kailash Manasarovar Yatra – 2015

कैलास मानसरोवर 2015 यात्रा का कंप्यूटराइज़्ड ड्रॉ आज संपन्न

1330 यात्री इस यात्रा सीज़न में जाएंगे शिवधाम

 नई दिल्ली, 20 अप्रैल, 2015 : पश्चिमी तिब्बत में हिंदुओं के पवित्रतम तीर्थस्थल कैलास-मानसरोवर जाने के इच्छुक तीर्थयात्रियों के भाग्य का फैसला आज यहां कंप्यूटराइज़्ड ड्रॉ से किया गया। कुल 2500 यात्रियों ने इस बार यात्रा के लिए आवेदन किया था । श्रीमती सुजाता मेहता, सचिव (ईआर) की अध्यक्षता में संपन्न कंप्यूटराइज़्ड ड्रॉ में 1080 का चयन उत्तराखंड से होकर गुजरने वाले पारंपरिक मार्ग से तथा 250 यात्रियों को इस साल पहली बार खुलने वाले सिक्किम में नाथुला मार्ग से शिगात्से तिब्बत होते हुए तीर्थयात्रा पर जाने के लिए चुना गया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की इस साल के शुरू में चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कैलास यात्रियों के लिए इस नए मार्ग को खोलने की घोषणा की थी।

KMY-3 317

विदेश मंत्रालय आगामी 8 जून से 9 सितंबर, 2015 तक कैलास मानसरोवर तीर्थयात्रा का आयोजन करेगा। पारंपरिक तीर्थयात्रा मार्ग से कुल 18 जत्थों में यात्रियों को भेजा जाएगा जबकि नाथुला से होते हुए तिब्बत के दूसरे सबसे बड़े शहर शिगात्से से कैलास धाम जाने के लिए इस बार सिर्फ 5 बैच रवाना होंगे। प्रत्येक बैच में कुल 50 यात्रियों का चयन किया गया है। इस तरह कुल ढाई सौ या​त्रियों को नए तीर्थयात्रा मार्ग से कैलास पर्वत और मानसरोवर झील के दर्शन करने के लिए जाने का मौका मिलेगा। यह मोटर मार्ग है और उत्तराखंड से होकर गुजरने वाले ट्रैकिंग रूट की तुलना में दुश्वारियों से काफी हद तक मुक्त भी होगा।

भारत और चीन के बीच समझौते के बाद 1981 से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से पैदल या घोड़ों-खच्चरों से होने वाली यात्रा के लिए चीन ने हर साल कुल 18 बैचों में 1080 यात्रियों को तीर्थयात्रा पर आने की अनुमति पहले ही दे रखी है। पिछले साल सर्वाधिक 910 तीर्थयात्रियों ने इसी मार्ग से होते हुए पावन कैलास और मानसरोवर के दर्शन किए थे।

नए मार्ग से चुने गए यात्रियों को दिल्ली से बागडोरा तक हवाई मार्ग से लाया जाएगा और फिर शुरू होगा 122 किलोमीटर दूर स्थित गंगटोक तक का सफर। यहां ठहरने के बाद यात्रियों को 45 किलोमीटर आगे नाथुला दर्रे तक जीपों से और फिर सीमा पार तिब्बत में भी सड़क मार्ग से लगभग 1400 किलोमीटर का रास्ता तय करना होगा।

इस यात्रा में पुराने मार्ग से 22 दिन जबकि नए मार्ग से 20 दिन का समय लगेगा और प्रति यात्री खर्च क्रमश: 1.25 लाख रु तथा 1.70 लाख रु होगा।

चुने गए यात्रियों की सूची विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई है जिसे http://bit.ly/1Q9wrGe पर देखा जा सकता है।

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