Mountains have myths and mysteries to share!

ऐतिहासिक अस्कोट—आराकोट अभियान 2014 के यात्रियों को सलाम! कहीं किसी राह पर मिलेंगे हम आप!

Life In Transit

Askot-Aarakot Abhiyan 2014

पहाड़ का जीवंत इतिहास लिखती एक महायात्रा

हुड़का की थाप के साथ थिरकने के अलावा उत्तराखंडी जनजातीय समाज की व्यथा-कथा भी कहती हैं हर दशक की पदचाप

पहाड़ों के मिथकों की थाह पाने से लेकर सामाजिक तड़प की पड़ताल का अभियान है पहाड़ (PAHAR – http://pahar.org/) संस्था द्वारा दस साल में एक बार आयोजित किया वाला अस्कोट-आराकोट अभियान। उत्तराखंड में नेपाल से लगे पूर्वी सीमावर्ती इलाके अस्कोट से 25 मई, 2014 को शुरू होने वाली इस पदयात्रा में शामिल यात्रियों के कदम अगले 45 दिनों तक पश्चिम की ओर बढ़ते रहेंगे और 8 जुलाई को उत्तरकाशी  में एक अन्य सीमावर्ती कस्बे आराकोट में पहुंचकर ही थमेंगे।

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अभियान के संस्थापक सदस्यों में से एक शेखर पाठक इसे जारी रखने के पीछे अपनी बेचैनी को छिपा नहीं पाते। वे कहते हैं, “पिछले 40 वर्षों में इस पदयात्रा का जो मिजाज़ रहा है, वह इस बार भी जारी रहेगा। यानी मंगथनवा (पूरे यात्रा मार्ग में पैदल सफर के…

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