Come closer to Uttrakhand and be a witness to a unique pilgrimage – Nanda Devi Rajjaat Yatra 2013

नंदा देवी राजजात यात्रा 2013

(29 अगस्‍त से 16 सितंबर, 2013)

अनजान रास्‍तों का अबूझ सफर

कहते हैं वास्‍तविक यात्राएं वही होती हैं जिनके ओर-छोर टूरिस्‍ट मानचित्रों पर कहीं दिखायी नहीं देते और असली ट्रैवलर भी वही है जो रटी-रटायी लीक पर चलने के बजाय किसी नए, अनजान, अनूठे और आश्‍चर्य में डाल देने वाली सड़कों को हमसफर बना ले। ऐसी ही एक लुभावनी यात्रा इस साल होने जा रही है जिसके आप साक्षी बन सकते हैं और अगर ट्रैकिंग का हौंसला रखते हैं तो इस अध्‍यात्मिक तीर्थयात्रा से जुड़कर उत्‍तराखंड के बेहद रमणीय लेकिन टूरिस्‍ट साइटों या टूर ऑपरेटरों की शब्‍दावली का अब तक हिस्‍सा नहीं बने इलाकों को साक्षात् देखने का आनंद पा सकते हैं।

उत्‍तराखंड के चमोली जिले (गढ़वाल) में कर्णप्रयाग तहसील से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित नौटी गांव में नंदाधाम से 29 अगस्‍त, 2013 शुरू होगी शैलपुत्री नंदा देवी की अपने मैत (मायके) से विधि-विधानपूर्वक विदाई की यात्रा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में लगभग 280 किलोमीटर लंबी इस यात्रा का मार्ग अत्‍यंत उबड़-खाबड़, विषम, खतरनाक इलाकों से गुजरता है। पूरे मार्ग में रात्रि पड़ावों में सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन, दिन भर मंदिरों, धामों से गुजरते हुए पूजा-हवन जैसी धार्मिक गतिविधियां इस यात्रा को अनूठा अध्‍यात्मिक रंग देती हैं। उत्‍तराखंड में गौरा को बेटी मानकर पूजा जाता है और जब वही बेटी भादो के कृष्‍णपक्ष में अपने मायके से विदा ले रही होती है तो मानसून की झड़ी भी लग चुकी होती है जिसे उत्‍तराखंडवासी मानते हैं कि विदाई पर आसमान भी अश्रुवर्षा कर रहा है।

नंदा देवी राजजात यात्रा वास्‍तव में, ईश्‍वरीय अनुभूति का मानवीय धरातल पर उत्‍सव है। विज्ञान और अंतरिक्ष युग की भागाभागी, अत्‍याधुनिक मशीनी उपकरणों की आम आदमी की जिंदगी में पैठ के बावजूद इस तरह की विषम यात्राओं में भोले-भाले ग्रामीणों की भागीदारी से लेकर देश-विदेश से इसमें शिरकत करने आए उत्‍सुक सैलानियों की दिलचस्‍पी कहीं धीरे से कह जाती है कि हिमालयी साए ने आज भी सैंकड़ों गाथाओं, मिथकों और किंवदंतियों को जिंदा रखा है।

अगर आपकी दिलचस्‍पी बारह बरस में एक बार होने वाली इस यात्रा में इस बार भागीदारी करने की है तो गढ़वाल मंडल विकास निगम की माउंटेनियरिंग एंड ट्रैकिंग डिवीज़न (http://www.gmvnl.com/newgmvn/nandadevi2013.aspx) से संपर्क कर सकते हैं। यात्रा शुरू होने से कम-से-कम 40 दिन पहले अपना आवेदन संबंधित डिवीज़न में पहुंचा दें ताकि इस महायात्रा की तैयारियों में एक नाम आपका भी जुड़ जाए। यात्रा की प्रकृति भले ही धार्मिक होती है मगर एडवेंचर की भरपूर खुराक भी इसके जरिए आपको मिलती है। यानि अगर आपकी प्रयोजन धार्मिक नहीं है, तो भी प्राकृतिक सौंदर्य, ट्रैकिंग या भ्रमण के वास्‍ते इस अनूठी यात्रा में भाग लिया जा सकता है।

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