Exploring the world while rediscovering your freedom !

महिला घुमक्‍कड़ों को मनचाही मंजिलों की सैर कराते टूरिज्‍़म क्‍लब

यूरोप की अनेक अकेली महिलाओं को हमने भारतभर में सैर करते देखा है। ऐसे में हम भारतीय महिलाओं के मन में भी घूमने की तमन्‍ना जागती है। मन करता है कि कंधे पर बैग टांग कर किसी मंजिल की ओर चल पड़ें। किसी झरने से गुफ्तगू हो। किसी पहाड़ का तकिया लगाकर किताबों को टटोला जाए। किसी समंदर के दिल की बात उसी के सिरहाने बैठकर सुनी जाए। लेकिन क्‍या करें ! अकेली औरत घर से बाहर निकले तो कैसे। सामाजिक बेडि़यों से तो निपट लें लेकिन सुरक्षा जैसे सवाल का क्‍या करें। किसी होटल के कमरे में अकेले कैसे ठहरें। किसी अभयारण्‍य में अकेले जंगल सफारी के लिए कैसे जाएं। ढेरों सवाल हैं और जवाब लेकर आए हैं महिला टूरिज्‍़म क्‍लब। ऐसे क्‍लब जिन्‍होंने अकेली महिलाओं को एक साथ जोड़कर पर्यटन का नया माहौल पैदा कर दिया है। हर उम्र, सतरंगी शौक और तरह-तरह के रोजगार से जुड़ी महिलाएं एक जगह एकत्र होकर दुनिया को नापने चल पड़ती हैं।

Image

Photo by Women On Clouds Club

आपको घुमक्‍कड़ी का शौक बेइंतहा है लेकिन घर में दूसरे लोगों को यह शगल रास नहीं आता, या फिर आप सिंगल हैं, जीवनसाथी या पार्टनर नहीं है, या है भी तो अपने काम में इतने मसरूफ हैं कि वैकेशन पर निकलना उन्‍हें नामुमकिन लगता है, तो क्‍या आप मन मसोसकर रह जाएंगी ? आपको सैर सपाटा पसंद है और जोखिम लिए बगैर यानी एकदम सुरक्षित पर्यटन चाहती हैं तो अब विमेन टूरिस्‍ट क्‍लब/ ग्रुप आपके ही इंतजार में हैं। टूर ऑपरेटरों की ही तरह ये भी एकदम पेशेवर हैं और सफर पर निकलने वाली अकेली औरतों के लिए योजनाओं को अमली जामा पहनाने में ये कोई कोर-कसर नहीं रख छोड़ते। होटल/रेसोर्ट की बुकिंग हो या हवाई/रेल यात्राओं की टिकटिंग तक की पूरी जिम्‍मेदारी ये सहजता से निभाते हैं। और आपको इनके साथ सफर करने पर मिलती हैं अपनी जैसी दूसरी महिलाएं। कार्पोरेट दुनिया में सफलता के ऊंचे मुकाम पर बैठी व्‍यस्‍त एग्‍ज़ीक्‍युटिव भी आपकी सहयात्री हो सकती है और गृह-गृहस्‍थी से ऊब चुकी हाउसमेकर भी।

Image

Photo by Women On Clouds Club

सुमित्रा सेनापति ने करीब आठ साल पहले ऐसा ही एक ट्रैवल क्‍लब बनाया था – ‘वाउ’ यानी विमेन ऑन वांडरलस्‍ट (www.wowsumitra.com) । पेशे से ट्रैवल राइटर सुमित्रा के मन में न्‍यूज़ीलैंड में सैल्‍फ ड्राइव टूरिज्‍़म के दौरान इस क्‍लब का विचार कौंधा। उन्‍होंने यूरोप में अक्‍सर महिलाओं को अकेले घूमते-फिरते देखा था, पूरी मौज मस्‍ती करती और सैर-सपार्ट का लुत्‍फ उठातीं ये महिलाएं बैकपैकर से लेकर किसी ट्रैवल ग्रुप की सदस्‍य हो सकती हैं। बेशक, यूरोप के बहुत से देशों में अकेली औरतों के लिए घूमना फिरना एकदम सुरक्षित और सहज होता है, लेकिन हमारे देश में इस तरह की सुविधाएं पिछले कुछ साल पहले तक नहीं थीं। लेकिन अब कई विकल्‍प सामने आए हैं जो अकेली औरतों के टूरिज्‍़म के सपनों को पूरा करते हैं।

Image

Photo by Women On Clouds Club

बदलते वक्‍त ने समाज की तस्‍वीर को बदला है, औरतें आर्थिक दृष्टि से मजबूत हुई हैं तो कहीं न कहीं परिवार से दूरी भी बनी है। कोई नौकरी के सिलसिले में स्‍वजनों से दूर रहने को मजबूर है तो कोई अपने किसी जुनून की खातिर अकेली जिंदगी जी रही है। कभी हालात ने किसी को अकेला बनाया तो किसी ने खुद अकेलापन चुना है। लेकिन इस पूरी तस्‍वीर का एक सुखद पहलू यह रहा है कि इन अकेली औरतों ने अपनी जिंदगी की छोटी-बड़ी इच्‍छाओं को पूरा करने का न सिर्फ मन बनाया है बल्कि वे जी-भरकर जिंदगी का लुत्‍फ उठाने की फिलॉसफी को जीने भी लगी हैं। उनकी सोच की तस्‍वीरों में रंग भरने के लिए ही अब देशभर में जगह-जगह ट्रैवल क्‍लब तैयार हुए हैं जो घुमक्‍कड़ी के शौक को पूरा करने में मददगार हैं। ट्रैवल कंपनी केसरी ने यायावर महिलाओं के लिए खास ‘माई फेयर लेडी’ (http://www.kesari.in/Speciality-Tours/My-Fair-Lady-Tours.asp) टूर पैकेज पेश किए हैं जो उन्‍हें देश-विदेश की कई जानी-अनजानी मंजिलों की सैर पर ले जाते हैं। इनमें से कितने ही टूर घोषित होते ही सोल्‍ड-आउट हो जाते हैं, जिससे इनकी लोकप्रियता और इनकी मांग के बारे में पता चलता है।

लगभग पांच साल पहले स्‍थापित एक अन्‍य विमेल ट्रैवल क्‍लब विमेन ऑन क्‍लाउड्स क्‍लब की शिरीन मेहरा कहती हैं, ‘‘हमारे साथ सैर-सपाटे पर जाने वाली औरतें जिंदगी में एकाकी होती हों, ऐसा नहीं है। कई बार ऐसा भी होता है कि परिवार में पति तो हैं मगर अपनी नौकरी या बिज़नेस में इतने उलझे होते हैं कि एक या दो दिन से ज्‍यादा का पर्यटन उन्‍हें सुहाता नहीं है। कई बार यह भी होता है कि अपनी नौकरी के सिलसिले में वे इतना ज्‍यादा टूर पर रहते हैं कि खाली वक्‍त मिलते ही बस टीवी के आगे बैठना, बची-खुची नींद लेना या घर में खाना-पीना ही उनको पसंद आता है। अगर पुराना दौर रहा होता तो ऐसे में अक्‍सर औरतों को अपने सपने भुला देने पड़ते थे। वो परिवार के साथ तालमेल बैठाया करती थीं, मगर अपने मन को मारने का मलाल जब-तब सताता रहता था। लेकिन अब ऐसा नहीं हैं। औरतें अब ताउम्र सिर्फ परिवार की चक्‍की में पिसते रहना नहीं चाहतीं, बल्कि वे अपने लिए भी जीना चाहती हैं।”

सुमित्रा के वाउ क्‍लब के साथ आप 8 से 21 जून 2013 तक कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकल सकती हैं या फिर मई में भूटान और चीन-तिब्‍बत की सैर भी कर सकती हैं। सिंगापुर से लेकर तनजानिया और उज्‍बेकिस्‍तान तक की सैर इस ऑल विमेन टूर क्‍लब के साथ सुकून भरे अंदाज़ में की जा सकती है। वाउ क्‍लब की साधना भतीजा ने बताया कि हर टूर में एक वाउ बडी भी साथ में रहता है जो सैर सपाटे पर निकली महिलाओं की पूरी देखभाल की जिम्‍मेदारी उठाता है। सैर की मंजिलों पर महिलाएं सिंगल, ट्विन शेयरिंग जैसे विकल्‍प चुन सकती हैं यानी मन तो हो होटल के कमरे में अकेले रहने की आजादी और अगर खर्चा बांटने का इरादा हो तो किसी साथी ट्रैवलर के साथ कमरा शेयर करने की सुविधा भी। इस तरह, ये ऑल विमेन टूर काफी हद तक लचीले होते हैं।

विमेन ट्रैवल ग्रुप्‍स के साथ टूर पर भी सिर्फ औरतें ही जा सकती हैं, अगर कोई महिला टूरिस्‍ट अपनी बे‍टी को साथ ले जाना चाहती है तो वह ऐसा कर सकती है, लेकिन लड़कों को साथ नहीं ले जाया जा सकता है। यानी पूरी तरह से गर्ल्‍स टाइम !

ऑल विमेन ट्रैवल क्‍लबों की लोकप्रियता दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रही है जिसे देखकर आसानी से यह अंदाज़ लगाया जा सकता है कि गर्ल्‍स रियली वॉन्‍ट टू हैव ऑल द फन इन लाइफ। आर्थिक आजादी ने उन्‍हें अपने छोटे छोटे सपनों को पूरा करने का हौंसला दिया है तो वहीं परिवार वाले भी अब कुछ खुले हैं। आजाद ख्‍याल औरतें अगर अपनी जिंदगी में प्रयोग करने के लिए तैयार हुई हैं तो उनके परिजन भी अब उन्‍हें अकेले जाने से नहीं रोकते। इन पेशेवर क्‍लबों ने अपनी साख बनायी है और यायावरी की उत्‍सुक महिलाओं को वो दिया है जिसकी फरमाइश उन्‍होंने की। जैसे अक्‍सर योग, ध्‍यान, रिलैक्‍सेशन वाले टूर हाथों हाथ बिक जाते हैं। इसी तरह, मिस्र के पिरामिडों से रूबरू कराने वाले टूर भी हैं तो कर्नाटक में गोकरणा तट पर सुकूनभरे, मेडिटेशन-योग थेरेपी के अवसर दिलाने वाले टूर भी।

सुरक्षा आज के दौर में सबसे अहम् मसला है, और सुमित्रा इसका भरपूर ख्‍याल रखती हैं। वे कहती हैं कि उनके ज्‍यादातर टूर पहले से चिर-परिचित मंजिल तक के लिए ही हैं। वे हमेशा ख्‍यातिनाम होटलों, लोकल साख प्राप्‍त साइटसींग कंपनियों और गाइडों को ही तरजीह देती हैं। वैसे भी अब बड़े होटल महिला टूरिस्‍टों की बढ़ती संख्‍या में मद्देनज़र काफी एहतियात बरतने लगे हैं। जैसे, कुछ होटल तो बाकायदा एक पूरा फ्लोर ही महिला टूरिस्‍टों के लिए आरक्षित रखने लगे हैं, यहां तक कि उस फ्लोर पर सर्विसिंग स्‍टाफ में भी महिला ही रखी जाती हैं।

यानी अगर कैलाश मानसरोवर की परिक्रमा का सपना बरसों से आपकी आंखों में तैर रहा है या ऋषिकेश में गंगा की अठखेलियां करती लहरों पर राफ्टिंग करने का अरमान मन के किसी कोने में छिपा हो, और नहीं तो लेह की बुलंद चोटियों के दीदार की ख्‍वाहिश कहीं अटककर रह गई है या फिर विदेशी सरजमीं पर टहलने का अरमान हो लेकिन सिर्फ इस वजह से मन – मसोसकर रह जाना पड़ जाता हो कि आप अकेली हैं, तो अब इस मजबूरी को झट से अलविदा कहने का वक्‍त आ चुका है।

………………………………………………………………………………….

Advertisements