IMG_20160730_095348

Ramoji film city – the land of million dreams

दक्कन में 48 घंटे कुल जमा 48 घंटों की मोहलत अगर किसी शहर को खंगालने की मिली हो तो भी आप क्या कुछ नहीं कर सकते, इसी चुनौती को बीते महीने स्वीकारा था। हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से काउंटडाउन शुरू हो चुका था। मगर हवाईअड्डे की दीवारों ने जैसे साजिशें शुरू कर दी…

IMG_20160802_173114

In the times of Rowling’s Harry Potter let’s take a turn to Khurja’s Potters

चिमनियों के शहर में खुर्जा से दोबारा वास्ता बना था करीब डेढ़ दशक बाद। पहली बार जब देखा तो सिर्फ शॉपिंग के अड्डे के तौर पर, जहां से सस्ते में ढेरों सामान खरीद लायी थी – सेरेमिक पॉट्स से लेकर सूप बोल्स, प्लेटें, कॉफी मग, कप, टी-पॉट और भी जाने क्या-क्या। फिर वक़्त की बेरहमी…

IMG_20160630_082113

How travelling with mom taught me the secrets of slow travel

सीनियर सिटीज़न पेरेंट्स के संग सफर वाकई है आसान  मैं भूल जाती हूं अपने एजेंडा, अपनी दौड़-भाग वाला पर्यटन, अपनी रफ्तार, अपनी हजारों ख्वाहिशें … मां के साथ सफर का मतलब है, मां, उनकी मंज़िल और मर्जी भी उनकी। बारिश मेरे लिए रोमांस है और उनके लिए कीचड़! पूरे एक सौ अस्सी डिग्री का फर्क…

IMG_20160625_174831

Haveli Dharampura – tête-à-tête with heritage in the by lanes of Old Delhi

बीते वक़्त की एक मिसाल – हवेली धरमपुरा शहरों को अक्सर आदत होती है सब कुछ निगल जाने की, और नया भूगोल बनाते हुए सबसे पहले वो अपना अतीत निगलते हैं। लेकिन कुछ ईंटे पुरानी बची रह जाती हैं, कुछ गलियां संभाल ली जाती हैं और कुछ पुराने आंगन भी वक़्त रहते या तो बचा लिए…

IMG_20160706_110607

क्यों Savaari की सवारी रास आ गयी #मस्तMaharashtra में

A review of Savaari Car Rental just to remind ourselves that we need to pat on the back of a good service provider (इन दिनों एक अजब दौर चला है, हम सिर्फ उन सेवाओं/उत्पादों का रिव्यू करते हैं जो मुफ्त पाते हैं, लेकिन अक्सर उनके बारे में तारीफ के दो शब्द लिखना भूल जाते हैं या लिखने…

IMG_20160704_153151

How the heritage status of a hotel in amchi Mumbai tricked me

Free wi-fi and only wife in the room! बंबई overwhelm करता है, अपनी खूबसूरती या बदसूरती या अपने पेशेवर अंदाज़ या अपनी बेफिक्री और बेताबियों से नहीं बल्कि कदम-कदम पर बदलते अपने तेवर से। शहर भर को पैदल या काली-पीली टैक्सियों से नापते हुए जो छवि बुनी थी मैंने वो ‘too-busy-to-care-what-you-do’ जैसी थी, लेकिन इसे दरकते हुए…

alkan

How to spend next two weeks in the capital #Delhi

चलो मिल आएं अपनों से, अपने ही शहर में दूर-दराज के आसमान टटोलने वाले हम सफरबाज़ों को कभी-कभी खुद अपने पंख कतर लेने चाहिए, और निकल पड़ना चाहिए अपने ही आंगन में यहां-वहां जमा अफसानों को टटोलने, नज़ारों को देखने और इसी बहाने अपने आप से मिलने। कितना अलग अहसास होता है न वो जब…